पंजाब डेस्कः नांदेड़ साहिब के गुरु घर में शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले के बाद उनकी चोट और इलाज से जुड़ा एक दर्दनाक वीडियो सामने आया है। वीडियो में उनकी बांह की हालत देखकर किसी का भी दिल दहल सकता है। चोट गंभीर थी और अब उसका इलाज और सर्जरी चल रही है। ऐसे समय में किसी भी इंसान के दर्द को देखकर संवेदना होना स्वाभाविक है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इंसान का दर्द राजनीति से कहीं बड़ा होना चाहिए।
आपको बतादें कि, सुखबीर बादल अपने परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारा माता साहिब कौर में माथा टेकने पहुंचे थे। इसी दौरान निहंग के भेष में आए एक शख्स ने उन पर कृपाण से हमला कर दिया। आरोपी की पहचान जसपाल सिंह के तौर पर हुई थी।

क्या राजनीति में इंसानियत भी खत्म हो गई
राजनीति में विचारों का विरोध होना बिल्कुल सामान्य है। किसी नेता के फैसलों पर सवाल उठाना भी लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन क्या राजनीतिक विरोध इतना आगे बढ़ जाना चाहिए कि किसी घायल व्यक्ति के दर्द और उसके इलाज का भी मज़ाक बनाया जाए?
अगर कोई व्यक्ति किसी के गंभीर घाव को देखकर उसका मज़ाक उड़ाता है या उसकी चोट को ही ‘नकली’ बताने की कोशिश करता है, तो यह सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं रह जाता। यह हमारी सोच और इंसानियत पर सवाल खड़ा करता है। सोचिए, अगर यही चोट हमारे परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या किसी करीबी को लगी होती, तो क्या हम उसके दर्द को झूठा बताते? क्या हम उसकी सर्जरी और इलाज का मज़ाक उड़ाते?
फिर किसी राजनीतिक नेता के साथ ऐसा व्यवहार क्यों
किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा या उसके फैसलों से असहमति हो सकती है। हम उसकी नीतियों की आलोचना कर सकते हैं, उसके काम पर सवाल उठा सकते हैं और उसके राजनीतिक फैसलों का विरोध भी कर सकते हैं। लेकिन उसके शारीरिक दर्द का मज़ाक उड़ाना किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता।
विरोध करें, लेकिन मर्यादा के साथ
लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन विरोध की भी एक सीमा और भाषा होती है। विचारधारा के आधार पर लड़िए, नीतियों पर बहस कीजिए और नेताओं से सवाल पूछिए। लेकिन जब कोई व्यक्ति अस्पताल में इलाज करा रहा हो और गंभीर चोट से गुजर रहा हो, तब कम से कम इंसानियत तो बची रहनी चाहिए।
पहले भी हो चुका है बादल पर हमला
इससे पहले भी सुखबीर सिंह बादल पर हमला हो चुका है। दिसंबर 2024 में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में पूर्व डिप्टी सीएम पर गोली चलाने की कोशिश की गई थी। यह घटना उस वक्त हुई थी, जब बादल अकाल तख्त की सजा के बाद स्वर्ण मंदिर के बाहर सेवा कर रहे थे। सुरक्षा कर्मियों ने हमलावर को तुरंत पकड़ लिया था और गोली सुखबीर बादल को नहीं लगी थी।हमलावर की पहचान नारायण सिंह चौड़ा के तौर पर हुई थी।