पंजाब डेस्क : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू हुआ “युद्ध नशे विरुद्ध” अभियान पंजाब में नशे के खिलाफ एक निर्णायकजन-आंदोलन बन चुका है। इसका उद्देश्य केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि समाज को नशे से मुक्त कर नई दिशा देना ।
मार्च 2025 से अब तक पंजाब पुलिस ने 21,888 एफआईआर दर्ज कर 33,124 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
साथ ही, 1,452 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई जो देशभर की कुल बरामदगी का करीब 60% है।
डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, पंजाब की 87% दोष सिद्धिदर भारत में सबसे अधिक है।
सरकार ने नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया है और पाकिस्तान सीमा पर 553 किमी एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं।
इसके साथ ही, 4,500 से अधिक गांवों ने खुद को “नशा मुक्त ग्राम” घोषित किया है। नवां शहर का लंगड़ोया गांव इस मुहिम की मिसाल बन चुका है।
नशे से पीड़ितों के पुनर्वास के लिए डी-एडिक्शन सेंटरों को मज़बूत किया गया है और स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक नशा विरोधी पाठ्यक्रम जोड़ा गया है।
लुधियाना की अमनजोत कौर कहती हैं, “सरकार की मदद से मैंने नशे से बाहर आकर नई जिंदगी शुरू की है।”
मुख्यमंत्री मान का कहना है, “‘युद्ध नशे विरुद्ध’ सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि जन चेतना का आंदोलन है। यह पंजाब की आत्मा को बचाने की जंग है।”

