मोगा: मोगा शहर में एक ओर लोगों को पानी की बचत करने के लिए जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वाहनों की धुलाई के नाम पर रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद होने का मामला सामने आ रहा है। शहर के कई सर्विस सेंटरों और वॉशिंग स्टेशनों पर कारों, मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों की धुलाई के दौरान बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल किया जाता है। धुलाई के बाद इस पानी को फिल्टर कर दोबारा उपयोग में लाने के बजाय सीधे नालियों में बहा दिया जाता है। इससे कीमती पानी की बर्बादी के साथ-साथ गंदे पानी की निकासी और सीवरेज व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही उनकी धुलाई करने वाले सर्विस सेंटरों और वॉशिंग स्टेशनों की संख्या भी बढ़ी है। दिनभर इन केंद्रों पर बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं। पाइप के जरिए लगातार पानी बहाकर वाहनों की धुलाई की जाती है। ऐसे में प्रत्येक सेंटर पर पानी की काफी खपत होती है। यदि सभी केंद्रों पर होने वाली खपत को देखा जाए तो रोजाना बड़ी मात्रा में पानी खर्च होने की आशंका है। हालांकि, शहर में इन केंद्रों की वास्तविक संख्या और पानी की कुल खपत के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
पानी बचाने की अपील घरों तक सीमित, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निगरानी जरूरी
पानी बचाने के लिए आम लोगों को घरों में नल खुला न छोड़ने, जरूरत के अनुसार पानी इस्तेमाल करने और अनावश्यक बर्बादी रोकने की सलाह दी जाती है। लेकिन पानी की अधिक खपत करने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर भी निगरानी जरूरी है। सर्विस सेंटरों में इस्तेमाल होने वाले पानी की मात्रा, उसकी निकासी और दोबारा उपयोग की व्यवस्था की जांच की जाए तो पानी की बर्बादी रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
वाहनों की धुलाई के दौरान पानी में मिट्टी, धूल, ग्रीस और तेल जैसी गंदगी मिल जाती है। यदि ऐसे पानी का उचित प्रबंधन किए बिना निकास किया जाता है तो इससे नालियों में गंदगी जमा होने और आसपास के क्षेत्र में पानी इकट्ठा होने की समस्या पैदा हो सकती है। कई स्थानों पर पानी सड़कों या खाली जगहों पर जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
रीसाइक्लिंग सिस्टम से बच सकता है काफी पानी
वाहनों की धुलाई में इस्तेमाल किए गए पानी को फिल्टर और ट्रीट करके दोबारा उपयोग में लाने के लिए वाटर रीसाइक्लिंग सिस्टम उपलब्ध हैं। ऐसी व्यवस्था अपनाने से ताजे पानी की खपत कम की जा सकती है। इसके बावजूद जिन केंद्रों पर पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था नहीं है, वहां धुलाई के बाद पानी नालियों में बह जाता है। ऐसे में संबंधित विभागों की ओर से सर्विस सेंटर संचालकों को पानी बचाने वाली तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
लगातार बढ़ती पानी की मांग के बीच भूजल का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। यदि वाहनों की धुलाई में जरूरत से ज्यादा पानी खर्च किया जाता है तो इससे पानी की खपत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए पानी की बचत के लिए केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी प्रभावी प्रबंधन जरूरी है।
मोगा नगर निगम की मेयर विनय पाल कौर ने कहा कि पानी की बर्बादी का मामला उनके ध्यान में आया है। उन्होंने कहा कि गलियों में या सर्विस सेंटरों में व्यर्थ पानी बहाने वालों पर नजर रखने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। यदि कोई पानी की अनावश्यक बर्बादी करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार बनती कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम से जांच करवाने की मांग
शहरवासियों की मांग है कि नगर निगम और संबंधित विभाग शहर में चल रहे सर्विस सेंटरों तथा वॉशिंग स्टेशनों की जांच करें। इस दौरान पानी के इस्तेमाल, गंदे पानी की निकासी और सीवरेज व्यवस्था का जायजा लिया जाए। साथ ही संचालकों को पानी की बर्बादी रोकने और संभव होने पर रीसाइक्लिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित किया जाए।
लोगों का कहना है कि पानी की बचत केवल घरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रोजाना बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल होता है, वहां भी जवाबदेही तय करना जरूरी है। यदि समय रहते पानी की खपत कम करने और इस्तेमाल किए गए पानी को दोबारा उपयोग में लाने के कदम उठाए जाएं तो बहुमूल्य जल संसाधनों को बचाने में मदद मिल सकती है।
📍 Location: मोगा
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