Punjab Weather Update: पंजाब में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। रात के तापमान में लगातार गिरावट के बीच बठिंडा राज्य का सबसे ठंडा स्थान दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दूसरी ओर, बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कटाई के लिए तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचने से किसान आर्थिक संकट को लेकर चिंतित हैं।
बठिंडा में सबसे ठंडी रात, सामान्य से 3.8 डिग्री नीचे रहा तापमान
पंजाब में रातें अब धीरे-धीरे ठंडी होने लगी हैं। शनिवार को बठिंडा में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य स्तर से 3.8 डिग्री कम था। पठानकोट में रात का पारा 14.7 डिग्री सेल्सियस रहा।
वहीं, चंडीगढ़, एसबीएस नगर, फरीदकोट, गुरदासपुर और पटियाला में न्यूनतम तापमान करीब 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राज्य के अन्य हिस्सों में रात का तापमान 17 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा।
रात में ठंड बढ़ने के बावजूद दिन के तापमान में अभी ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया।
25 अक्टूबर के बाद सक्रिय हो सकता है पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, फिलहाल पंजाब में मौसम साफ रहने की संभावना है। हालांकि, 25 अक्टूबर के बाद पश्चिमी विक्षोभ के दोबारा सक्रिय होने से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
इसके प्रभाव से राज्य के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की आशंका है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर किसानों और आम लोगों की नजर बनी रहेगी। खासकर धान की कटाई के दौर में बारिश की संभावना कृषि कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
पंजाब के कई इलाकों में हालिया बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों को बड़ा झटका दिया है। गांव नथाना, गंगा और आसपास के क्षेत्रों में कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने महीनों की मेहनत से फसल तैयार की थी। धान पक चुका था और कटाई की तैयारी चल रही थी, लेकिन खराब मौसम ने उनकी उम्मीदों को नुकसान पहुंचाया। कुछ खेतों में फसल पूरी तरह बर्बाद होने की बात सामने आई है, जबकि कई अन्य खेतों में भी काफी नुकसान हुआ है।
गंगा गांव में 21 एकड़ धान की फसल प्रभावित होने का दावा
गांव गंगा के किसान बलकरण सिंह के मुताबिक, उनकी 12 एकड़ जमीन में खड़ी पकी धान की फसल ओलावृष्टि से बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी गांव के किसान चन्नी सिंह ने भी अपनी नौ एकड़ फसल बर्बाद होने की जानकारी दी।
दोनों किसानों की बताई गई जमीन का कुल रकबा 21 एकड़ है। किसानों के अनुसार, फसल की कटाई अगले एक-दो दिनों में शुरू होने की उम्मीद थी। ऐसे समय में बारिश और ओलावृष्टि होने से उनकी मेहनत और संभावित आमदनी पर गंभीर असर पड़ा है।
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आर्थिक दबाव के बीच किसानों की बढ़ी चिंता
फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों की आर्थिक परेशानियां और गहरी हो सकती हैं। खेती की लागत, मेहनत और फसल से होने वाली आमदनी की उम्मीद के बीच प्राकृतिक आपदा ने अनिश्चितता बढ़ा दी है।
अब प्रभावित किसानों को नुकसान के आकलन और संभावित राहत की उम्मीद है। वहीं, मौसम विभाग के बारिश संबंधी पूर्वानुमान को देखते हुए आने वाले दिनों में मौसम की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि कटाई के लिए तैयार फसल को आगे होने वाले नुकसान से बचाने के प्रयास किए जा सकें।

