Dainik Savera Times

‘Kohara वेब सीरीज ने खोली पंजाब के दर्द की परतें’, समाजसेवी निरंजन विद्यासागर ने जताई चिंता

web series 'Kohara' uncovered layers of pain in Punjab

पंजाब डेस्क: नेटफ्लिक्स की सीरीज कोहरा की तारीफ़ इसलिए हो रही है क्योंकि यह सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है, बल्कि पंजाब की ज़मीन से जुड़ी सच्चाई को सामने लाती है। जिसने भी पंजाब को पास से देखा है, वह समझ सकता है कि यह कहानी किसी कल्पना से ज़्यादा हकीकत के करीब है। इस वेब सीरीज को लेकर समाजसेवी निरंजन विद्यासागर ने खुशहाल पंजाब को लेकर चिंता जाहिर की है।

पंजाब की खूबसूरती और छिपी हुई सच्चाई
समाजसेवी निरंजन विद्यासागर ने कहा कि जब कोई पहली बार पंजाब जाता है, तो वह उसकी खूबसूरती से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। खुला आसमान, दूर-दूर तक फैले हरे-भरे खेत, और लोगों का गर्मजोशी से स्वागत करना यह सब मन को सुकून देता है। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों की भागदौड़ और कंक्रीट की इमारतों के बीच जो घुटन महसूस होती है, वह यहाँ आकर कम हो जाती है। लेकिन समय के साथ एक अलग तस्वीर सामने आती है। सतह के नीचे कई गंभीर समस्याएँ छिपी हुई हैं।

ग्रीन रेवोल्यूशन के बाद की चुनौती
निरंजन विद्यासागर ने बताया कि पंजाब ने ग्रीन रेवोल्यूशन के जरिए देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाया। यहाँ के किसानों ने देश को अनाज से भर दिया। लेकिन वही मॉडल अब पंजाब की अर्थव्यवस्था पर बोझ बन गया है। किसान आज भी मुख्य रूप से गेहूं और धान पर निर्भर हैं। MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य), मुफ्त बिजली और सब्सिडी वाले खाद पर निर्भरता बढ़ गई है। इन नीतियों ने कुछ समय तक राहत दी, लेकिन खेती में विविधता (डायवर्सिफिकेशन) रुक गई। उद्योग और आईटी सेक्टर के विकास में राज्य पीछे रह गया, जबकि दूसरे राज्यों ने टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स में आगे बढ़त बना ली।

युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या
उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात है पंजाब का युवा वर्ग। नशे की समस्या धीरे-धीरे आम होती गई। पहले शराब, फिर ड्रग्स और अब केमिकल नशे का खतरा बढ़ रहा है। कई परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट रहे हैं।सोशल मीडिया ने भी स्थिति को जटिल बना दिया है। युवा वर्ग दिखावे और नकली पहचान की दुनिया में उलझ रहा है। जमीन से जुड़ाव कम होता जा रहा है, और असली समस्याओं से ध्यान हट रहा है।

फिल्मों से अलग असली पंजाब
बॉलीवुड में अक्सर पंजाबी किरदार को खुशमिजाज, ऊर्जावान और मज़ाकिया दिखाया जाता है। लेकिन कोहरा यह दिखाता है कि असल जिंदगी में कई परिवार कर्ज, टूटते रिश्तों और सामाजिक दबाव से जूझ रहे हैं।पुरानी पीढ़ी अपने खेतों और मेहनत पर गर्व करती थी। आज की पीढ़ी गुस्से, धार्मिक कट्टरता और सोशल मीडिया की दुनिया में उलझी दिखाई देती है।

कोहरा सिर्फ मौसम नहीं, एक प्रतीक है
उन्होंने कहा कि इस सीरीज़ में ‘कोहरा’ केवल धुंध नहीं है, बल्कि वह उन समस्याओं का प्रतीक है जो साफ दिखाई नहीं देतीं। जब तक हम इन मुद्दों को स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक हम इन्हें केवल एक क्राइम स्टोरी समझते रहेंगे।

आगे का रास्ता
निरंजन विद्यासागर ने कहा कि पंजाब टूटा हुआ राज्य नहीं है। उसमें आज भी क्षमता है। लेकिन जरूरत है, ईमानदार और दूरदर्शी नेतृत्व की। खेती में सुधार और विविधता लाने की। युवाओं को सही दिशा और रोजगार देने की। नशे के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई की। कोहरा एक चर्चा की शुरुआत करता है। अब समाज और सरकार को मिलकर इस बातचीत को आगे बढ़ाना होगा।

Exit mobile version