Site icon Dainik Savera Times

रबी फसलों की MSP बढ़ी, गेहूं के दाम में 25 रुपये की वृद्धि पर किसान नाराज

Wheat MSP Hiked by ₹25 per Quintal : मोगा। सरकार ने गेहूं समेत छह रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की है। गेहूं की MSP 25 रुपये बढ़कर 2610 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है, जबकि कुसुम की MSP में सबसे अधिक 675 रुपये की वृद्धि की गई है। किसान नेता भूपिंदर सिंह दौलतपुरा ने गेहूं की MSP में बढ़ोतरी को खेती की बढ़ती लागत के मुकाबले अपर्याप्त बताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।

 

https://dainiksaveratimes.com/wp-content/uploads/2026/10/431751.mp4

सरकार के फैसले के अनुसार जौ की MSP में 136 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2286 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। चने की MSP में 83 रुपये की वृद्धि के बाद इसका नया भाव 5958 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। मसूर की MSP में 390 रुपये और सरसों की MSP में 413 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। कुसुम की MSP में 675 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसका नया भाव 7015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक हाड़़ी सीजन के दौरान करीब 324 लाख मीट्रिक टन फसल की खरीद होने की उम्मीद है।

इससे किसानों तक करीब 90,962 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान जताया गया है। किसान नेता ने बताया नाकाफी MSP में हुई बढ़ोतरी को लेकर भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष भूपिंदर सिंह दौलतपुरा ने इसे नाकाफी बताया है। उन्होंने कहा कि गेहूं पंजाब की मुख्य फसल है और इसकी MSP में केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों की बढ़ती लागत के मुकाबले बेहद कम है। दौलतपुरा ने कहा कि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और अन्य कृषि सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

किसानों को फसल तैयार करने के लिए पहले के मुकाबले काफी अधिक खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन फसलों के दाम में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि वर्ष 1970 में गेहूं का भाव करीब 76 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि अब यह 2610 रुपये हो गया है। उनके अनुसार इस दौरान खेती से जुड़ी कई वस्तुओं और सेवाओं की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि किसान आर्थिक दबाव और कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं और केवल मामूली MSP बढ़ोतरी से उनकी स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आएगा।

किसान नेता ने केंद्र सरकार से मांग की कि MSP निर्धारित करते समय खेती की वास्तविक लागत को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसान संगठनों के साथ बैठकर लागत और फसल के लाभकारी मूल्य पर चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सके। उन्होंने केंद्र सरकार से MSP बढ़ोतरी के फैसले पर पुनर्विचार करने की भी मांग की।

Exit mobile version