
Wheat Sowing Begins on 100+ Acres : अमृतसर। गांव किरतोवाल खुर्द के किसानों ने पराली प्रबंधन की मिसाल पेश करते हुए हैप्पी सीडर और सुपर सीडर मशीनों से 100 एकड़ से अधिक भूमि पर गेहूं की बुआई शुरू की। कृषि विभाग के ब्लॉक अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीकों से खेती की लागत घटाने, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने और किसानों की आमदनी में इजाफा करने में मदद मिलती है।
हर किसान की यही कोशिश होती है कि फसल उत्पादन की लागत कम से कम हो और आमदनी ज़्यादा से ज़्यादा हो। यह लक्ष्य आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर और उनका सही इस्तेमाल करके ही हासिल किया जा सकता है। पट्टी के ब्लॉक कृषि अधिकारी, डॉ. भूपिंदर सिंह ने गाँव किरतोवाल खुर्द में ‘हैप्पी सीडर’ और ‘सुपर सीडर’ मशीनों के ज़रिए 100 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर गेहूँ की बुआई की शुरुआत के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि पिछले सात सालों से इस गाँव के किसान फसल अवशेषों (पराली) का बहुत अच्छे से और पूरे उत्साह के साथ प्रबंधन कर रहे हैं, जो दूसरे किसानों के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि नवंबर के पहले 15 दिन गेहूँ की बुआई के लिए सबसे सही समय होते हैं।
अच्छी पैदावार पाने के लिए सही समय पर बुआई करना और साफ़, प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है। बुआई से पहले बीजों को अनुशंसित कीटनाशकों और फफूंदनाशकों से उपचारित करना भी बहुत फ़ायदेमंद होता है। इस मौके पर, किसानों सुखविंदर सिंह (25 एकड़), प्रोफ़ेसर गुरलाल सिंह (40 एकड़), गुरजिंदर सिंह (30 एकड़) और तहसीलदार जसविंदर सिंह (30 एकड़) ने ‘हैप्पी सीडर’ का इस्तेमाल करके गेहूँ की बुआई शुरू की, जबकि किसान गुरभेज सिंह ने ‘सुपर सीडर’ मशीन से 5 एकड़ ज़मीन पर गेहूँ की बुआई की।
अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों ने बताया कि फसल अवशेषों (पराली) का प्रबंधन करना कोई मुश्किल काम नहीं है; बल्कि, सही तरीके से प्रबंधन करने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ी है और फसल की पैदावार भी बेहतर हुई है। ‘हैप्पी सीडर’ तकनीक के फ़ायदों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. भूपिंदर सिंह ने बताया कि यह गेहूँ की बुआई के लिए एक आसान और किफायती तकनीक है। धान और बासमती की फ़सल कटने के बाद, खेत में मौजूद नमी (वत्तर) का इस्तेमाल करके इसमें सीधे बुआई की जा सकती है। इस तरीके से पानी (जो बुआई से पहले खेत की सिंचाई यानी ‘रौनी’ के लिए इस्तेमाल होता) और समय, दोनों की काफ़ी बचत होती है। इसके अलावा, यह खेतों में खरपतवार की समस्या को कम करने में मदद करता है।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे फसल के अवशेषों (पराली) को न जलाएं, क्योंकि इन्हें जलाने से ऊपरी मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है, जिससे मिट्टी की नमी खत्म हो जाती है और लाभदायक सूक्ष्मजीवों की संख्या कम हो जाती है। इसका जमीन की उपजाऊ क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए, किसानों को आधुनिक मशीनों का उपयोग करके फसल के अवशेषों का उचित प्रबंधन करना चाहिए। इस मौके पर फील्ड वर्कर फतेह सिंह और अन्य स्थानीय किसान भी मौजूद थे, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया और खेती से जुड़ी जानकारी साझा की।
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