लुधियाना: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। काम का बढ़ता दबाव, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक समस्याएं और सोशल मीडिया पर दूसरों से खुद की तुलना करने की आदत लोगों के मानसिक सुकून को प्रभावित कर रही है। ऐसे में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनसे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत एक बार फिर सामने आई है।
मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक सेहत जितना जरूरी
अक्सर लोग शारीरिक बीमारी होने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देर नहीं करते, लेकिन मानसिक परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार इसे कमजोरी, नकारात्मक सोच या इच्छाशक्ति की कमी समझ लिया जाता है। यही सोच लोगों को समय पर मदद लेने से रोकती है।
मनोचिकित्सक डॉ. गैबी सेठी के साथ हुई बातचीत में मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लेने के महत्व पर जोर दिया गया। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं किसी भी उम्र और सामाजिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें लेकर शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय सही जानकारी और उपचार को प्राथमिकता देना जरूरी है।
लगातार तनाव बन सकता है गंभीर समस्या की वजह
तनाव जीवन का सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो इसे अनदेखा करना नुकसानदायक हो सकता है। लगातार चिंता, उदासी, नींद में परेशानी, चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना और लोगों से दूरी बनाने जैसे लक्षण मानसिक स्वास्थ्य में गड़बड़ी के संकेत हो सकते हैं।
समय पर ध्यान नहीं देने पर कुछ लोगों में अवसाद (डिप्रेशन) और एंग्जायटी जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। इन स्थितियों का असर व्यक्ति के रिश्तों, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। गंभीर मामलों में आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं, इसलिए ऐसे संकेतों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
सही इलाज से संभव है बेहतर जीवन
मानसिक बीमारी का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता। समस्या के प्रकार और गंभीरता के आधार पर मनोचिकित्सक दवाओं, मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) या अन्य उपयुक्त उपचारों की सलाह दे सकते हैं। समय पर पहचान और नियमित उपचार से कई लोगों के लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
परिवार और दोस्तों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति की बात धैर्य से सुनना, उसे दोष देने से बचना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ तक पहुंचने में मदद करना उसके लिए सहायक हो सकता है।

