Last Updated: September 29, 2026

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PAU में जश्न-ए-इंकलाब में उमड़ा युवाओं का सैलाब, जाम से शहर बेहाल

September 29, 2026

PAU में जश्न-ए-इंकलाब में उमड़ा युवाओं का सैलाब, जाम से शहर बेहाल

Youth Turnout Surges at PAU’s ‘Jashn-e-Inquilab’ : लुधियाना। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) में आयोजित ‘जश्न-ए-इंकलाब’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा और लोग पहुंचे। भारी भीड़ के चलते बद्दोवाल से भारत नगर तक कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ा। समारोह में कुलविंदर बिल्ला और रणजीत बावा की प्रस्तुतियों ने युवाओं में खासा उत्साह भर दिया।

लुधियाना मे दोपहर तीन बजे से पंजाब के विभिन्न कोनों से लोग अपने वाहन लेकर लुधियाना के पीएयू पहुंचना शुरू हो गए थे। लोगों के जनसैलाब के आगे जिला प्रशासन के सभी इंतजाम की कम पड़ गए। नतीजा बाद दोपहर से बद्दोवाल से लेकर शहर के भारत नगर पर जाम लग गया। पीएयू के आसपास एरिया में शाम के बाद वाहन निकलने के लिए कोई जगह नहीं बची। लोग लगभग दो घंटे तक इस जाम में फंसते हुए समारोह स्थल तक पहुंचे।

विधायक से लेकर आम लोग ज्यादातर पीली पगड़ी पहनकर समारोह को देखने के लिए पहुंचे। पीएयू के अंदर भी हालात कुछ इसी तरह के रहे, लोग इतनी संख्या में पहुंच गए कि जिला प्रशासन को भी इंतजाम करना मुश्किल पड़ा। इसके बावजूद लोगों ने जैसे गायक कुलविंदर बिल्ला ने अपनी गायकी का जौहर दिखाना शुरू किया। लोगों से चेहरे से यह सभी परेशानियां गायब हो गई।

सबसे पहले भगत सिंह को लेकर एक वार गाई, इसके बाद कागजां दी लोड़ कोई न साढ़े दिलां से भगत सिंह लिखाया। लगभग एक घंटे तक बिल्ला ने झुमर से लेकर कई गाने गाकर लोगों को नाचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद पंजाब की मिट्टी से जुड़े गायक रणजीत बावा का युवाओं में सबसे ज्यादा क्रेज रहा। सबसे पहले आते ही, नी आपा किसे तो की लैणा जट्टिएं तेरे जट्ट की चढ़ाई बड़ी आ से शुरूआत करते युवाओं को साथ में थिरकने के पर जमबूर कर दिया।

इसके बाद लोगों को सबसे पसंद मेरा बापू कहड़ा करदा ब्लैक नहीं, आह जेहड़ा तैनू लुधियाने ले दइया फ्लैट नीं पर माहौल में रंग जमा दिया। इस गाने पर युवाओं से लेकर बुजुर्ग भी नाचते दिखे। इसके बाद बावा ने नीं मुंडा पटिया गुलाबी पगवाला.. सहित रात लगभग दस बजे तक माहौल को बनाए रखा। युवाओं में इतना जोश था कि कई बार कार्यक्रम को बीच में रोकना पड़ा।

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