
स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय शतरंज के युवा सितारे आर प्रज्ञानंद ने इतिहास रच दिया है। ओस्लो में खेली गई नॉर्वे शतरंज प्रतियोगिता में प्रज्ञानंद ने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया है। वह यह प्रतियोगिता जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। पहले वे खेल में काफी पिछड़ रहे थे लेकिन आखिरी में उन्होंने शानदार वापसी कर चैंपियन बन गए।
साल 2013 में टूर्नामेंट शुरू होने के बाद से भारत के चेस लेजेंड विश्वनाथन आनंद और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी इसे जीत नहीं पाए थे, लेकिन प्रज्ञानंद ने ये कारनामा कर दिखाया। प्रज्ञानंद ने इस टूर्नामेंट में विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराया। इस टूर्नामेंट में भारतीय विश्व चैंपियन डी गुकेश भी हिस्सा थे, लेकिन वह खिताब की दौड़ से बाहर हो गए।
खिताबी मुकाबला में अमेरिका के ग्रैंडमास्टर वेसली सो अपनी बढ़त को बनाए नहीं रख पाए और ड्रॉ के बाद आर्मागेडन टाई-ब्रेक में फंस गए, जिसने प्रज्ञानंद के लिए दरवाजे खोल दिए, जिसका फायदा उठाते हुए अंतिम राउंड में प्रज्ञानंद ने खिताब अपने नाम कर लिया।
आनंद महिंद्रा ने दी बधाई
आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बधाई दी है, जिसमें उन्होंने लिखा- तुमने सिर्फ एक खिताब नहीं जीता, बल्कि तुम शेर की मांद में घुसे और वहां से विजेता बनकर बाहर निकले। यह जीत सिर्फ चमचमाती ट्रॉफी की वजह से नहीं बल्कि प्रज्ञानंद के कभी न हार मानने वाले जज्बे के कारण खास है, जिससे हम सभी को सीख लेनी चाहिए।
“To beard the lion in his den.”
The dictionary defines it as boldly confronting a powerful rival on their own turf.
For years, Norway Chess has been Magnus Carlsen’s den. His turf. His domain.
So I woke up to this news and my jaw dropped.
You didn’t just win a title,… pic.twitter.com/1F2j0fMJgm
— anand mahindra (@anandmahindra) June 6, 2026
मेष: दिन शुभ रहेगा...