
विशाखापत्तनम: अर्शदीप सिंह कह चुके हैं कि उनका पसंदीदा शौक वसीम अकरम और जहीर ख़ान के यूट्यूब वीडियो देखना है ताकि यॉर्कर और रिवर्स स्विंग की बारीकियां सीख सकें। अर्शदीप ने इन वीडियो से मिली सीख का इस्तेमाल टी-20 में खूब किया है इसलिए ऐसा यू हीं नहीं हुआ है कि वह इस प्रारूप में 100 से अधिक विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने, लेकिन हाल में रांची और रायपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनके स्पेल ने यह दिखाया कि इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को 50 ओवर के प्रारूप में लगातार मौके दिए जाने चाहिए क्योंकि अभी तक उन्हें इतने ज्यादा मौके नहीं मिले हैं।
अगर प्रत्येक मैच में उनके आंकड़े देखें (64 रन देकर 2 विकेट और 54 रन देकर 2 विकेट) तो यह सामान्य लगते हैं, लेकिन इन्हें दक्षिण अफ्रीका के 332 और 362 रन के विशाल स्कोर के साथ देखें तो तस्वीर बदल जाती है। उनके बचपन के कोच जसवंत राय कहते हैं, ‘इस चीज में पिछले समय में उसके अंदर काफी सुधार हुआ है। वह परिस्थितियों को समझते हैं, लैंथ के अनुसार सांमजस्य बिठाते हैं। अब गेंदबाजी में विविधता लाने का महत्व समझते हैं ताकि उनकी गेंदों का अनुमान नहीं लग सके। सफेद गेंद के क्रिकेट में यह बहुत जरूरी है क्योंकि बल्लेबाज हमेशा रन बटोरना चाहते हैं। वह अब एक परिपक्व और मानसिक रूप से मजबूत गेंदबाज बन गया है।’
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