Last Updated: November 5, 2026

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सीडब्ल्यूजी 2026: फ्लू से बचने के लिए स्वच्छता अपनाएं एथलीट, डॉ. दिनशॉ पारदीवाला की सलाह

July 25, 2026

सीडब्ल्यूजी 2026: फ्लू से बचने के लिए स्वच्छता अपनाएं एथलीट, डॉ. दिनशॉ पारदीवाला की सलाह

खेल डेस्क :  ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। भारत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने फ्लू से बचने के लिए भारतीय एथलीटों से सफाई का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी है।

आईएएनएस से बात करते हुए डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने कहा कि फ्लू से बचने के लिए भारतीय दल के सभी सदस्यों को साफ-सफाई का कड़ाई से पालन करना चाहिए। एथलीटों को निरंतर हाथ धोते रहना होगा। इससे संक्रमण का जोखिम कम होगा।

पारदीवाला ने डोपिंग पर कहा, “मुझे लगता है कि डोपिंग खेलों में एक बड़ी समस्या है। हमें इसे किसी भी तरह खत्म करना होगा। असल में, डोपिंग एक तरह की धोखाधड़ी है और भारतीय होने के नाते हम नहीं चाहेंगे कि हमारी पहचान धोखेबाजों के तौर पर हो। अक्सर ऐसा होता है कि कोई एक व्यक्ति गलत काम करता है और उस एक व्यक्ति की वजह से पूरे देश की बदनामी होती है।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सख्ती बरतना जरूरी है। ऐसे लोगों की पहचान करना और उन्हें खेल से बाहर करना जरूरी है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने ‘क्लीन स्पोर्ट’ (साफ-सुथरे खेल) के लिए नीरज चोपड़ा फाउंडेशन के साथ मिलकर एक बहुत अच्छी पहल शुरू की है। मुझे लगता है कि अगले एक-दो सालों में इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा।”

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बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की पदक की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। बर्मिंघम में जूडो में देश के लिए रजत पदक जीतने वाली तूलिका मान ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर हो गई हैं। मान को नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने 12 महीनों के अंदर तीन बार लोकेशन फेल होने पर कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया है। नाडा से निलंबन के कारण टीम से बाहर कर दिया गया। वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) के नियमों के मुताबिक, मान पर अब दो साल का बैन लग सकता है।

27 साल की तूलिका के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स से हटने का मामला एक और भारतीय जूडोका, अरुण कुमार के आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद कुछ समय के लिए निलंबित होने के एक दिन से भी कम समय बाद आया। अरुण कुमार नाडा के आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन ड्रग टेस्ट में फेल हो गए। इस वजह से उन्हें निलंबित कर दिया गया और टीम से बाहर कर दिया गया। इन दोनों खिलाड़ियों के निलंबन के कारण भारतीय जूडो टीम की परेशानी बढ़ी हुई है। ऐसे में डोपिंग से निश्चित रूप से खिलाड़ियों को बचने की कोशिश करनी चाहिए।

 

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