Last Updated: September 21, 2026

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‘टीम भारत की है, किसी एक धर्म की नहीं’, ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर कीर्ति आजाद ने जताई आपत्ति

March 10, 2026

‘टीम भारत की है, किसी एक धर्म की नहीं’, ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर कीर्ति आजाद ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली: भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता, जिसके बाद टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, जय शाह और गौतम गंभीर हनुमान मंदिर गए। टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने पहले सोशल मीडिया के जरिए ट्रॉफी लेकर मंदिर में जाने पर आपत्ति जताई और अब कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था।

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मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा क्यों नहीं?

कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर तीखी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ”जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के खिलाड़ी थे। हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे। आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?”

 

यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की

उन्होंने आगे लिखा कि यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं! सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए। संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए। संजू ने टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की है। यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है।

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि आप टीम के लिए खेलते हैं। देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं। सभी उस टीम का हिस्सा हैं। 1983 में जब हम जीते थे, तब भी सभी धर्म के लोग थे। खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वो अपनी टीम का होता है। इन लोगों ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है। उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की तारीफ करते हुए कहा कि टीम भारत, हिंदुस्तान की टीम है।

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भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया

उन्होंने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर कहा कि फिर भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया। उन्होंने कहा कि मैं खुद हिन्दू हूं, लेकिन खेलते वक्त कभी धर्म को नहीं जोड़ा। आर्ट का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया। हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था। उन्होंने कहा, “हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था।”

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