Last Updated: November 7, 2026

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Pencak सिलाट और स्क्वे राष्ट्रीय खेलों में पदार्पण को तैयार

October 26, 2023

Pencak सिलाट और स्क्वे राष्ट्रीय खेलों में पदार्पण को तैयार

पणजी: देश में मार्शल आर्ट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी के बीच जम्मू-कश्मीर में बेहद लोकप्रिय मार्शल आर्ट के दो रूप पेनकैक सिलाट और स्क्वे राष्ट्रीय खेलों(National Games) में पदार्पण करने के लिए तैयार हैं।गोवा में 37वें राष्ट्रीय खेलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी दिखाई दे रहा है। स्क्वे को कश्मीरी पारंपरिक मार्शल आर्ट के रूप में जाना जाता है और इसका अभ्यास तब से किया जाता है जब मनुष्यों को नियमित रूप से जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने की आवश्यकता होती है। ऐसा कहा जाता है कि बहुत पहले दिया देव नाम के एक राजा ने एक ऐसी सेना स्थापित करने के निर्देश दिए थे जो विशेष रूप से स्क्वे में कुशल हो।मार्शल आट्र्स गोवा स्काय एसोसिएशन के अध्यक्ष सिद्धेश श्रीपद नाइक ने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए बहुत गर्व की बात है कि स्काय को पहली बार राष्ट्रीय खेलों में शामिल किया गया है। हमारे महासंघ में लगभग 23 राज्यों के खिलाड़ी शामिल हैं, वे सभी इसमें भाग ले रहे हैं।’’

37वें राष्ट्रीय खेलों में गोवा के पदक जीतने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा, ‘‘ यह खेल गोवा में भी पिछले 20 सालों से खेला जा रहा है. हमारे खिलाड़ी और कोच भी लंबे समय से इससे जुड़े हुए हैं। मार्शल आर्ट इवेंट पेनकैक( Pencak) सिलाट की शुरुआत इंडोनेशिया में हुई लेकिन यह जम्मू और कश्मीर में बहुत लोकप्रिय हो गया है।’’ उन्होने बताया कि यह एक लड़ाकू, गैर-आक्रामक मार्शल खेल है जिसमें सामूहिक रूप से इंडोनेशिया से उत्पन्न मार्शल आर्ट की विभिन्न शैलियों को शामिल किया गया है। लड़ाई के इस रूप में हमला करना, हाथापाई की तकनीक और फेंकना शामिल है।

पेनकैक सिलाट में पूरे शरीर की लड़ाई शामिल है, जहां शरीर के किसी भी हिस्से का इस्तेमाल किया जा सकता है और शरीर के किसी भी हिस्से पर हमला किया जा सकता है। लड़ाई का यह रूप आत्मरक्षा के साधन के रूप में इंडोनेशिया में उत्पन्न हुआ और एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में विकसित हुआ। यह गेम अब देश के कई हिस्सों में खेला जा रहा है।पेनकैक सिलाट के टूर्नामेंट निदेशक मोहम्मद इकबाल ने कहा, ‘‘खिलाड़यिों के लिए इसमें भाग लेने के लिए यह एक अच्छा मंच है। हम सभी का सपना था कि हम राष्ट्रीय खेल में शामिल हों। अब इसमें भाग लेने वाले बच्चों के माता-पिता भी बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ 27 राज्यों ने इन खेलों के लिए क्वालीफाई किया है। इतने बड़े मंच पर खेलना खिलाड़यिों के लिए सौभाग्य की बात है और सभी टीमें इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। जो अच्छा खेलेगा वही पदक जीतेगा।’’

 

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