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रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए आगे की राह आसान नहीं, अजीत अगरकर का बड़ा बयान !

Ajit Agarkar: विराट कोहली और रोहित शर्मा को घरेलू क्रिकेट खेलना ही होगा। यह बीसीसीआई की ओर से भारत के इन दो स्टार क्रिकेटरों को एक स्पष्ट संकेत है। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर द्वारा इस संबंध में दिए गए संकेत से भारतीय क्रिकेट में एक नए अध्याय की शुरुआत होती दिख रही है। विराट कोहली और रोहित शर्मा को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 19 अक्टूबर से शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज़ के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों सीनियर खिलाड़ियों का क्रिकेट भविष्य सुरक्षित है। अजीत अगरकर की बातों से साफ़ संकेत मिलता है कि उनका चयन टीम और घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन के आधार पर होगा। रोहित शर्मा की जगह शुभमन गिल को कप्तानी की ज़िम्मेदारी मिलने के बाद कहा जा रहा है कि भविष्य में कई बदलाव होने तय हैं।

अजीत अगरकर ने क्या कहा?
बीसीसीआई चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर से जब पत्रकारों ने पूछा कि विजय हजारे ट्रॉफी के लिए विराट कोहली या रोहित शर्मा में से किसे चुना जाना चाहिए, तो अगरकर ने कहा, “हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब भी खिलाड़ी उपलब्ध हों, उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए।” इसका मतलब है कि अब से रोहित शर्मा और विराट कोहली का चयन पूरी तरह से उनके प्रदर्शन और योग्यता के आधार पर होगा।

जनवरी में, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ हारने के बाद, बीसीसीआई ने दस सूत्रीय आदेश जारी किया था। उस आदेश का एक प्रमुख बिंदु यह था कि सभी उपलब्ध खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलें। उस समय यह स्पष्ट किया गया था कि इस नियम का पालन सभी को करना होगा।

BGT श्रृंखला के बाद विवाद
रोहित शर्मा और विराट कोहली के सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद, भारतीय टीम को पिछले साल हुई टेस्ट सीरीज़ में करारी हार का सामना करना पड़ा था। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज़ में उन्हें 3-0 से सफ़ाई का सामना करना पड़ा और ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट सीरीज़ 3-1 से हार का सामना करना पड़ा। इस संदर्भ में, बीसीसीआई ने मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ बातचीत करके कड़े कदम उठाए थे।

इस समय तक, इन दोनों सीनियर क्रिकेटरों के खिलाफ अफवाहें फैल चुकी थीं। पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर और अनिल कुंबले समेत कई लोगों ने राय जताई थी कि इन दोनों को अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए। बीसीसीआई ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और निर्देश दिए, और एक दशक बाद ये दोनों रणजी ट्रॉफी मैचों में दिल्ली और मुंबई के लिए मैदान पर नज़र आए।

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