Site icon Dainik Savera Times

अंडर-18 टीम की उपलब्धि पर गर्व, कोच सरदार बोले- यह जीत नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी

U18 Team Achievement

U18 Team Achievement

जापान के काकामिगाहारा में हुए अंडर-18 पुरुष एशिया कप में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन लाजवाब रहा। फाइनल मुकाबले में जापान को हराकर टीम ने खिताब को अपने नाम किया। टीम के कोच सरदार सिंह का कहना है कि यह जीत इन युवा खिलाड़ियों को भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।

जापान की सरजमीं पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद भारतीय पुरुष और महिला टीम सोमवार को भारत पहुंची। कोच सरदार सिंह ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए कहा, “हां, बिल्कुल। आप जानते हैं कि इस तरह की जीत के बाद देश भर के सभी हॉकी प्रेमी जश्न मनाते हैं और अपना सपोर्ट दिखाते हैं। आप खिलाड़ियों में जोश देख सकते हैं, और यह बहुत अच्छा लगता है कि इतने सारे लोग उनका स्वागत करने आए। जब आप मेडल जीतकर आते हैं, तो आपको काफी प्यार मिलता है। सोशल मीडिया पर फैंस ने टीम को काफी प्यार दिया, यहां तक कि प्रधानमंत्री ने भी टीम के प्रदर्शन की सराहना की, जो अच्छी चीज है। यह जीत मेरे हिसाब से आने वाले समय में इन खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करेगी।”

ये भी पढ़ें- https://dainiksaveratimes.com/sports/ind-vs-afg-test-match-day-2-score-manav-suthar/

भारतीय पुरुष टीम के कप्तान केतन कुशवाहा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी कप्तानी में टीम उस भरोसे पर खरी उतर सकी, जो कोच ने सभी खिलाड़ियों पर दिखाया था। केतन ने कहा कि उन्हें खुशी है कि टीम चैंपियन बनकर भारत लौटी है। कप्तान के अनुसार, टूर्नामेंट में एक-दूसरे को सपोर्ट करना सबसे अहम रहा।

जापान के खिलाफ खिताबी मुकाबले में तीन गोल दागने वाले आशीष तानी पूर्ती ने कहा कि गोल्ड जीतकर देश आने पर काफी अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि टीम ने सोचा था कि देश के लिए गोल्ड जीतकर आना है और हम ऐसा करने में सफल रहे, जिससे हमें काफी खुशी मिली है।

वहीं, भारतीय विमेंस अंडर-18 हॉकी टीम टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर स्वदेश लौटी। टीम की कप्तान स्वीटी कुजुर ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनकी अगुवाई में टीम गोल्ड मेडल जीतने से चूक गई। स्वीटी के अनुसार, भारतीय विमेंस टीम काफी मजबूत थी और गोल्ड जीतने की प्रबल दावेदार थी। उन्होंने कहा कि हम अपनी गलतियों की वजह से यह सुनहरा मौका गंवा बैठे।

Exit mobile version