
Randhir Singh passes away: भारतीय खेल प्रशासन के दिग्गज और एशियाई खेलों में भारत को पहला शूटिंग गोल्ड मेडल दिलाने वाले रणधीर सिंह का 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ समय से बीमार थे और उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन से पूरे खेल जगत में गहरा दुख है।
भारतीय शूटिंग के पहले एशियाई खेल स्वर्ण विजेता
रणधीर सिंह ने साल 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में इतिहास रचा था। उन्होंने ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को इस स्पर्धा में पहली बड़ी सफलता दिलाई। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि वे एशियाई खेलों में शूटिंग में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने।
ओलंपिक में लंबा और शानदार रहा सफर
रणधीर सिंह ने अपने करियर में भारत का प्रतिनिधित्व कई बड़े मंचों पर किया। उन्होंने 1968 से 1984 तक लगातार 5 ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया। वे भारत के प्रमुख निशानेबाजों में गिने जाते थे। उन्हें उनके खेल प्रदर्शन के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
खेल प्रशासन में भी निभाई अहम भूमिका
खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने प्रशासन में बड़ा योगदान दिया। 1987 से 2014 तक वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के मानद महासचिव रहे। 1991 से 2015 तक वे एशियन ओलंपिक काउंसिल (OCA) के महासचिव रहे। 2001 से 2014 तक वे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के सदस्य रहे। 2024 में उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी मिली जब वे OCA के अध्यक्ष चुने गए। 2026 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।
ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के अध्यक्ष बने
सितंबर 2024 में रणधीर सिंह को OCA अध्यक्ष बनाया गया। यह चुनाव निर्विरोध हुआ था और 45 एशियाई देशों ने उनका समर्थन किया था। वे इस पद तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बने।
खेलों की विरासत वाला था परिवार
रणधीर सिंह का संबंध एक प्रतिष्ठित खेल परिवार से था। उनके पिता राजा भलिंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य थे। उनके चाचा महाराजा यादवेंद्र सिंह ने 1951 के पहले एशियाई खेलों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई थी।
भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति
रणधीर सिंह का योगदान सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारत और एशिया में खेल प्रशासन को नई दिशा दी। उनके निधन को खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।