Sheetal Devi : भारत की युवा पैरा आर्चरी खिलाड़ी शीतल देवी ने चीन के ग्वांग्जू में आयोजित वर्ल्ड पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया। बता दें कि सिर्फ 18 साल की उम्र में शीतल ने ऐसा इतिहास रच दिया जो अब तक कोई नहीं कर पाया था। दरअसल शीतल दुनिया की पहली ऐसी पैरा आर्चरी खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने बिना हाथों के गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।
तुर्की की शीर्ष खिलाड़ी को दी मात
महिलाओं की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में शीतल का मुकाबला तुर्की की नंबर-1 तीरंदाज ओजनूर क्यूर गिर्डी से था। मैच की शुरुआत से ही रोमांच अपने चरम पर था। पहले राउंड में दोनों खिलाड़ियों का स्कोर 29-29 रहा। दूसरे राउंड से शीतल ने कमान संभाली और लगातार तीन शॉट में 10-10 अंक बटोरते हुए 30-27 से बढ़त बना ली।
SHEETAL DEVI IS WORLD PARA CHAMPION! 🥇🇮🇳
18-year-old beats the reigning champion Oznur Cure in Gwangju.#WorldArchery #ParaArchery pic.twitter.com/d5jDmdYkhq— World Archery (@worldarchery) September 27, 2025
तीसरे राउंड में दोनों का स्कोर फिर बराबर रहा और यह 29-29 पर खत्म हुआ। चौथे राउंड में तुर्की की गिर्डी ने वापसी की कोशिश की और 29 अंक जुटाए, जबकि शीतल ने 28 अंक हासिल किए। चार राउंड के बाद शीतल 116-114 से दो अंकों की बढ़त बनाए रहीं।
अंतिम राउंड में दिखाया कमाल
निर्णायक पांचवें राउंड में शीतल ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए अपने तीनों शॉट में पूर्ण 30 अंक हासिल किए। इसके साथ उनका कुल स्कोर 146 पहुंच गया, जबकि गिर्डी 143 अंकों पर रुक गईं। इस तरह शीतल ने 146-143 से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल भारत के नाम किया।
अद्भुत जज़्बे की मिसाल
शीतल देवी का यह प्रदर्शन केवल खेल उपलब्धि ही नहीं बल्कि प्रेरणा की कहानी भी है। बिना हाथों के जन्मी शीतल ने कभी अपनी कमजोरी को बाधा नहीं बनने दिया। वे पैरों और ठुड्डी का इस्तेमाल करके धनुष खींचती और तीर चलाती हैं। उनकी यह अद्भुत तकनीक और अथक मेहनत ने उन्हें विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

