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प्राचीन भारत में 12 प्रकार की संतानों को अपने पिता का कानूनी उत्तराधिकारी माना जाता था। उन सभी को अपने कानूनी पिता की जैविक संतान होने की आवश्यकता नहीं है। मनु स्मृति और अन्य धर्म शास्त्रों में 12 अलग-अलग तरीकों का वर्णन किया गया है जिससे एक बच्चा किसी का कानूनी उत्तराधिकारी बन सकता है।.