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सलोकु मः ३ ॥ वाहु वाहु आपि अखाइदा गुर सबदी सचु सोइ ॥ वाहु वाहु सिफति सलाह है गुरमुखि बूझै कोइ ॥ वाहु वाहु बाणी सचु है सचि मिलावा होइ ॥ नानक वाहु वाहु करतिआ प्रभु पाइआ करमि परापति होइ ॥१॥ कोई (एकाध) गुरमुख समझता है की ‘वाह वाह’ कहना परमात्मा की सिफत सलाह करनी.