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वडहंसु महला १ घरु २ ॥ मोरी रुण झुण लाइआ भैणे सावणु आइआ॥ तेरे मुंध कटारे जेवडा तिनि लोभी लोभ लुभाइआ॥ तेरे दरसन विटहु खंनीऐ वंञा तेरे नाम विटहु कुरबाणो ॥ जा तू ता मै माणु कीआ है तुधु बिनु केहा मेरा माणो ॥ हे बहिन! सावन (का महिना) आ गया है (सावन की काली.