-
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए। जब बशीर बद्र ने ये पंक्तियां लिखी होंगी तो कोई नहीं जानता था कि ये शाम कब होगी। ये पंक्तियां आज स्वयं एक विदाई का सन्नाटा बनकर गूंज रही हैं। संवेदनशील सितारा हो गया अस्त उर्दू शायरी.