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एक युवा ब्रह्मचारी देश-विदेश का भ्रमण और वहां के ग्रंथों का अध्ययन कर अपने देश लौटा। वह सबके सामने शेखी बघारने लगा कि उसके समान ज्ञानी और कोई नहीं। उसके पास जो भी व्यक्ति जाता, वह उससे प्रश्न करता कि क्या उसने उससे बढ़कर कोई विद्वान देखा है? यह बात गौतम बुद्ध के कानों तक.