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भारतीय पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में देवी-देवता मानवीय स्वरूप में स्वीकार्य हैं। चूंकि हम सगुण की उपासना करते हैं, इसलिए सगुण की हम मानवीय रूप में ही आराधना करते हैं। उनका जन्म होता है, विवाह होता है। परिवार होता है, निवास, वाहन, बच्चे, पसंद के फूल, फल…..मौसम, महीना….. सब कुछ ठीक वैसे ही जैसे इंसान के.