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नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने जीएसटी चोरी के लिए फर्जी चालान और ई-वे बिल जारी करने की गंभीरता को देखते हुए इसे आर्थकि अपराध की श्रेणी में रखा है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान होता है। न्यायमूर्ति अमित बंसल ने गैर-मौजूद संस्थाओं द्वारा जारी झूठे चालान बनाकर जालसाजी और जीएसटी चोरी के आरोपी चार्टर्ड.