हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 18 सितंबर

धनासरी महला १ घरु २ असटपदीआ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ गुरु सागरु रतनी भरपूरे ॥ अम्रितु संत चुगहि नही दूरे

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