-
“एक बार मैं चीन देश गया था, जिनसे मैं कभी मिला नहीं था, उन्होंने अपनत्व से मेरा माथा चूमकर मुझे अपना बना लिया।” “कविगुरु” रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ये पंक्तियाँ “मेरे जन्मदिन पर” शीर्षक से 21 फरवरी, 1941 को लिखी थीं, अपनी मृत्यु से महज़ कुछ महीने पहले। इन चार पंक्तियों में चीन के प्रति उनका जो.