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नई दिल्ली। भोर की पहली किरण जब शहर की नींद पर धीरे से दस्तक देती है, उसी समय किसी निर्माण स्थल पर हथौड़े की चोटें नए कल की नींव रखने लगती हैं। यह ध्वनि केवल पत्थर नहीं तराशती, बल्कि उस भविष्य को गढ़ती है जिसे हम विकास के नाम से पहचानते हैं। अदृश्य है भविष्य.