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ईश्वर की कुदरत को निहारने लगो तो हमें उसका ओर-छोर ही समझ नहीं आता। कहां से आरम्भ करें? यह सबसे बड़ा प्रश्न सामने आ जाता है। हम जितना अधिक उसकी सृष्टि के बारे में सोचते हैं, उतना ही उसमें डूबते जाते हैं। उसकी सृष्टि में डूबे रहने वालों को हम दार्शनिक कहते हैं। वे उसके.