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Hukamnama : सूही महला १ ॥ जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ॥ तिउ साकतु जोनी पाइ भवै भवाईऐ ॥१॥ बिनु बूझे सभु दुखु दुखु कमावणा ॥ हउमै आवै जाइ भरमि भुलावणा ॥१॥ रहाउ ॥ तूं गुरमुखि रखणहारु हरि नामु धिआईऐ ॥ मेलहि तुझहि रजाइ सबदु कमाईऐ ॥२॥ अर्थ : जैसे भठ्ठी में लोहा डाल कर.