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आज का अंतरिक्ष अब किसी एक देश या सरकार की सीमाओं में बंधा नहीं रहा। पहले जब हम स्पेस की बात करते थे, तो हमारे मन में सिर्फ सरकारी एजेंसियों की छवि उभरती थी… बड़े रॉकेट, भारी बजट और लंबी तैयारी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में उतर.