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जयपुरः उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को कहा कि संसद और विधानमंडल संवाद, बहस और विमर्श के लिए होते हैं, न कि उपद्रव के लिए। धनखड़ ने कहा कि संविधान सभा के समक्ष अपेक्षाकृत अधिक जटिल मुद्दे होने के बावजूद वहां कोई व्यवधान नहीं हुआ था, जबकि आज जो स्थिति है, वह ‘चिंता और चिंतन’.