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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा 1996 में किए गए एक फ्लैट आवंटन को रद्द करने को खारिज कर दिया है और निर्देश दिया है कि फ्लैट को आवंटी के बेटे को सौंप दिया जाए। अदालत ने पाया कि डीडीए द्वारा आवंटन रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन.