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प्राचीन भारत में योग मुख्य रूप में ऋषि-मुनियों तक ही सीमित था। आम व्यक्ति के जीवन में योग का उतना प्रसार नहीं था, लेकिन समय के साथ योग की महत्ता को समझा गया और आज यह न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में स्वास्थ्य और मानसिक शांति का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है।.