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एक बार जगत की सृष्टि करने वाले ब्रह्मा जी अपनी सभा में बैठे हुए थे। अचानक ही उनके नेत्रों से आंसू छलक पड़े। उन्हीं आंसुओं से एक वानर की उत्पत्ति हुई। ब्रह्मा जी ने उस वानर का नाम ऋक्षराज रखा और उसे कि¨ष्कधापुरी भेज दिया। वहां उसे वानर राज्य के सिंहासन पर बैठाया गया। ऋक्षराज.