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घर को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना पुरूष सिर्फ अपना ही अधिकार समझता है। पत्नी की आय को अतिरिक्त ही समझा जाता है। जब पुरूष का यह एकाधिकार टूटता है तो वह अपराध बोध एवं हीन भावना से ग्रसित हो जाता है। उसे लगता है कि अब वह सर्वोच्च स्थान पर नहीं रहा बल्कि अब उस.