Last Updated: October 3, 2026

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भारतीय वायुसेना ने विजय दिवस की ऐतिहासिक जीत में अपनी भूमिका को किया याद

December 16, 2024

भारतीय वायुसेना ने विजय दिवस की ऐतिहासिक जीत में अपनी भूमिका को किया याद

नई दिल्ली। भारत हर साल 16 दिसंबर को 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी निर्णायक जीत की याद में विजय दिवस मनाता है, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। भारतीय वायुसेना ने विजय दिवस की ऐतिहासिक जीत में अपनी निर्णायक भूमिका को याद किया है। इंडियन एयरफोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘1971 का भारत-पाक युद्ध 16 दिसंबर 1971 को लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी के बिना शर्त आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ, जो एक स्वतंत्र बांग्लादेश के जन्म का प्रतीक था।

यह ऐतिहासिक क्षण एक समन्वित सैन्य प्रयास के माध्यम से हासिल किया गया था, जिसमें भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 13-दिवसीय संघर्ष में त्वरित और निर्णायक परिणाम सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे उपयुक्त रूप से ‘लाइटनिंग वॉर‘ कहा गया था। ‘इस दौरान भारतीय वायुसेना ने एक घातक हवाई अभियान को अंजाम दिया, पश्चिमी क्षेत्र में 2400 से अधिक आक्रामक मिशन और पूर्वी क्षेत्र में 2000 से अधिक उड़ानें भरी।

इन ऑपरेशनों ने दोनों क्षेत्रों में हवा पर नियंत्रण सुनिश्चित किया, जिससे प्रतिद्वंद्वी की प्रभावी ढंग से जवाबी हमला करने की क्षमता खत्म हो गई। पूर्व में रणनीतिक हमलों ने जमीनी बलों के लिए करीबी हवाई समर्थन के साथ मिलकर पाकिस्तानी सुरक्षा के पतन को तेज कर दिया, जिससे बांग्लादेश की शीघ्र मुक्ति में मदद मिली।‘

पोस्ट में भारतीय वायुसेना के पराक्रम के बारे में आगे लिखा गया, ‘आसमान में भारतीय वायुसेना का प्रभुत्व इतना प्रभावशाली था कि जब जनरल नियाजी से बड़े पैमाने पर अक्षुण्ण सेना होने के बावजूद उनके आत्मसमर्पण के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने एक अधिकारी की वर्दी पर भारतीय वायुसेना के प्रतीक चिन्ह की ओर इशारा किया और टिप्पणी की, ‘इसके कारण‘। 1971 का युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास में एक मील का पत्थर था, जिसने भारतीय वायुसेना की सटीकता, ताकत और युद्ध के मैदान पर परिणामों को आकार देने की क्षमता का प्रदर्शन किया था। इस अद्वितीय जीत को हासिल करने में इसकी भूमिका आधुनिक युद्ध में हवाई श्रेष्ठता के महत्व का प्रमाण बनी हुई है।‘

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