फिरोजाबाद: दुर्गम पर्वतीय इलाकों में घायल सैन्यकर्मियों को तत्काल उपचार दिलाने में ड्रोन अब एयर एंबुलेंस की तरह काम करेगा। फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी ने दो क्विंटल तक वजन उठाने में सक्षम एंबुलेंस ड्रोन ऐरावत-3 को विकसित किया है, ताकि भविष्य में चीन-पाकिस्तान सीमा पर अत्यधिक ऊंचाई पर फंसे घायल और बीमार सैनिकों को तत्काल उपचार केंद्रों तक पहुंचाया जा सके। यह ड्रोन सीमाओं की निगरानी में भी कारगर साबित हो सकता है। इसमें राडार सिस्टम भी जोड़ा जा रहा है ताकि बर्फीले तूफान में फंसे हुए जवानों के बारे में आकलन किया जा सके।
जनरल मैनेजर अमित कुमार ने बताया कि इस ड्रोन को बनाने का उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में सैनिकों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करना है। यह ड्रोन विशेष रूप से अत्यधिक ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्रों के लिए बनाया जाएगा, ताकि समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाई जा सके। खास बात यह कि इसे स्वदेशी पुर्जों की मदद से विकसित किया गया है। यह ड्रोन 2 क्विंटल वजन के साथ प्रतिकूल मौसम में भी एक घंटे में 18 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इस ड्रोन की कुल लागत 65 लाख रुपए है.20 ड्रोन ऐरावत सेना को अभी सप्लाई किया गया है।

