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यौन उत्पीड़न केस: इलाहाबाद HC पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका

Avimukteshwarananda reaches Allahabad High Court

Avimukteshwarananda reaches Allahabad High Court

नई दिल्ली: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में अब कानूनी लड़ाई इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका दाखिल की है। यह याचिका अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से दाखिल की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है।

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क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत अर्जी दाखिल की। अर्जी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। मामले को गंभीर मानते हुए एडीजे (रेप और पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने प्रयागराज के झूंसी थाना पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश दिया।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
अदालत के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी थाना में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर निम्न धाराओं में दर्ज हुई है, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3)लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धाराएं 5L, 6, 3, 4(2), 16 और 17… पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

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कितनी हो सकती है सजा?
इस केस में कुल सात गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। कानून के जानकारों के अनुसार, इन धाराओं में 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों में अंतरिम या अग्रिम जमानत मिलना आसान नहीं होता, हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सबकी नजरें हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत मिलती है या नहीं।

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