
नेशनल डेस्क। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चाइनीज मांझे की वजह से एक युवक की जान चली गई। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पहले से ही चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध था, लेकिन इसके बावजूद इसका इस्तेमाल हो रहा था। ताजा घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में इस पर पूरी तरह रोक लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
सीएम योगी के सख्त आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर तुरंत कार्रवाई की जाए। पूरे प्रदेश में छापेमारी की जाएगी। सीएम ने यह भी कहा है कि अगर किसी की मौत चाइनीज मांझे से होती है, तो उसे हत्या के मामले की तरह माना जाएगा। की गई कार्रवाई की उच्च स्तर पर समीक्षा भी की जाएगी।
कैसे हुई लखनऊ में यह दर्दनाक घटना
यह हादसा लखनऊ के हैदरगंज चौराहे के पास फ्लाईओवर पर हुआ। 35 वर्षीय मोहम्मद शोएब स्कूटी से मार्केट जा रहे थे। जैसे ही वह फ्लाईओवर पर चढ़े, अचानक चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मांझा बहुत तेज और धारदार था। जब तक शोएब कुछ समझ पाते, मांझे के खिंचाव से उनकी गर्दन गंभीर रूप से कट गई। वह संतुलन खोकर स्कूटी से नीचे गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
कौन थे मोहम्मद शोएब
मोहम्मद शोएब दुबग्गा इलाके की सीते विहार कॉलोनी के रहने वाले थे। वह एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के तौर पर काम करते थे। उनके परिवार में पत्नी फौजिया, 7 साल की बेटी बुशरा, 2 साल की बेटी इकरा और उनकी मां आबिदा बानो हैं। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पहले से लगा है चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध
चाइनीज मांझा, जिसे सिंथेटिक या नायलॉन मांझा भी कहा जाता है, बहुत खतरनाक होता है। यह न सिर्फ इंसानों बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित होता है। कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहले ही इसकी बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा चुके हैं। इसके बावजूद यह चोरी-छिपे बाजारों में बिक रहा है, जिससे प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कानून के तहत क्या सजा हो सकती है
चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत 5 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 188 के तहत 6 महीने तक की सजा या जुर्माना हो सकता है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत 50,000 रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की सजा का प्रावधान है।