Last Updated: September 24, 2026

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छात्रों की दाढ़ी को लेकर फिर विवादों में आया इस्लामिक शिक्षण केंद्र Darul uloom

February 21, 2023

छात्रों की दाढ़ी को लेकर फिर विवादों में आया इस्लामिक शिक्षण केंद्र Darul uloom

देवबंदः देवबंदी विचारधारा के इस्लामिक शिक्षण केंद्र दारुल उलूम देवबंद छात्रों के दाढ़ी कटवाने को लेकर एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया है। इस संस्था ने एक पखवाड़ा पूर्व बड़ी कक्षाओं के चार उन छात्रओं को संस्था से निकाल दिया था जिन्होंने अपनी दाढ़ी कटवाकर छोटी कर ली थी। दारुल उलूम देवबंद में वहां के छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों समेत सभी पर यह नियम लागू होता है कि वे हाथ की हथेली या फिर मुट्ठी में अपने जितनी दाढ़ी अनिवार्य रुप से रखेंगे। बताया जाता है कि इस्लाम मजहब में इसे सुन्नत माना जाता हैं।

दारुल उलूम के शिक्षा विभाग ने सभी छात्रों को चेतावनी दी है कि यदि वे अपनी दाढ़ी कटवाते हैं तो उन्हें पढ़ाई छोड़नी होगी। ऐसे छात्रों को संस्था से निकाल दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के इंचार्ज मौलाना हुसैन अहमद ने मंगलवार को बताया कि जिन छात्रों को दाढ़ी कटवाने के कारण संस्था से 15 दिन पहले निष्कासित किया गया था उन्होंने दाढ़ी कटवाने को लेकर खेद जताया था और निष्कासन रद्द करने की मांग की थी। उनके कबूलनामे और माफीनामे को दारुल उलूम के प्रबंधकों ने स्वीकार नहीं किया है। ये छात्र वार्षिक परीक्षा से भी महरुम रह सकते हैं।

दारुल उलूम देवबंद दाढ़ी को लेकर तीन साल पहले फतवा भी जारी कर चुका है। जिसमें वहां के मुफ्तियों ने कहा था कि इस्लाम धर्म में दाढ़ी कटवाना हराम है। दारुल उलूम के प्रवक्ता रहे अशरफ उस्मानी ने कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। सभी को पहले से यह मालूम है कि दारुल उलूम विशेष रुप से इस्लामिक शिक्षण संस्था है। वहां पर सभी के लिए दाढ़ी रखना जरुरी है।

मदरसा जामिया शेखूल हिंदू के मोहत्मिम मुफ्ती असद कासमी ने मंगलवार को कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने जो भी तौर-तरीके अपनाए हैं उसे इस्लाम धर्म में सुन्नत माना जाता हैं। हर मुसलमान को शरियत के नियमों और सुन्नत का पालन करना चाहिए। दाढ़ी रखना भी सुन्नत है। उन्होने कहा कि यह अलग बात है कि जो लोग दाढ़ी नहीं रखते तो वह मुसलमान धर्म से खारिज नहीं माने जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मुट्ठीभर से ज्यादा बढ़ी हुई दाढ़ी कटवाने में कोई बुराई नहीं है।

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