प्रयागराज। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कौशांबी की घटना का जिक्र कर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक नाकामयाबी की वजह से लोगों की जानें जा रही हैं। अखिलेश यादव के बयान पर केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जातियों में विभाजन पैदा करने के लिए अखिलेश यादव ऐसे बयान देते हैं। अखिलेश यादव के बयान पर केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने बातचीत में कहा, ‘अखिलेश यादव जातियों में विभाजन पैदा करने के लिए ऐसे बयान देते हैं। वह दिल्ली और लखनऊ की लड़ाई बताते हैं। अगर ऐसा होता तो पिछले पांच चुनावों (2014, 2017, 2019, 2022, 2024) में जनता ने उन्हें (अखिलेश यादव) बाहर का रास्ता न दिखाया होता। हम सभी एक हैं और हमारे मुख्यमंत्री का ही कहना है कि जो बंटेगा वो कटेगा।‘
उन्होंने कहा, ‘धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव के घर में अखिलेश यादव ट्विटर पुत्र पैदा हो गए हैं, जो हर छोटी-बड़ी घटना पर सिर्फ ट्वीट करते रहते हैं, जबकि उन्हें 48 डिग्री तापमान में मौके पर जाना चाहिए।‘ दरअसल, अखिलेश यादव ने कौशांबी की घटना का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भाजपा की अंदरूनी राजनीति की शर्मनाक लड़ाई में, अब कौशांबी में दो भाजपाई उपमुख्यमंत्री, दो समाज के लोगों को आपस में लड़वा रहे हैं। पहले एक उपमुख्यमंत्री ने नाइंसाफी करते हुए ‘पाल’ समाज के लोगों को मोहरा बनाया, फिर दूसरे उपमुख्यमंत्री ने अपने उस समाज के नाम पर झूठी सहानुभूति दिखाई, जो समाज इन दोनों के ‘ऊपरवालों’ को नहीं भाता है। इसलिए पीछे से वो भी सक्रिय हो गए, जिनकी पहले वाले उपमुख्यमंत्री से पुरानी खींचातानी है और फिर इन ऊपरवालों के ऊपरवालों की भी आपस में टकराहट है, इसलिए केंद्र वाले, कौशांबी की राजनीति करने वालों के साथ खड़े हैं।‘
उन्होंने आगे लिखा, ‘ध्यान से समझा जाए तो ये भाजपा की अंदर की राजनीति में मचा एक बड़ा घमासान है, जिसमें दो या दो से अधिक समाजों को आपस में भिड़वाकर ‘कौशांबी, लखनऊ, दिल्ली’ की भाजपाई राजनीति अपना वीभत्स खेल खेल रही है, जिसका शिकार जनता हो रही है। इस लड़ाई में वो भी कूद पड़े हैं, जिनका समाज ‘सत्ता सजातीय’ राजनीति का विशेष रूप से शिकार है और लगातार सत्ता के निशाने पर है, जिसके कारण दूसरे उपमुख्यमंत्री अपने समाज पर हो रहे अत्याचार और अपमान पर अपनी कुर्सी बचाने के लिए सुविधाजनक चुप्पी साधे बैठे हैं।‘

