
उत्तर प्रदेश में वाराणसी की जिला अदालत ने रिकार्ड 4 महीने में चर्चित ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला बुधवार को सुना दिया। कोर्ट ने सभी सुबूतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए फैसला दिया है कि वाराणसी के डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट (DM) एक हफ्ते में पुजारी की नियुक्ति करें और पूजा-पाठ शुरू करवाएं।
मुस्लिम समुदाय की तरफ से जिला अदालत में पेश हुए वकील ने कहा कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि फैसला एक तरफा और न्यायसंगत नहीं है। बता दें कि क्षानवापी मस्जिद में साल 1993 से पूजा पाठ बंद था और 25 सितंबर 2023 को शैलेंद्र व्यास ने याचिका दायर तहखाने में पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग की थी।

हफ्ता पहले खोला था तहखाने का दरवाजा
कोर्ट के आदेश पर डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट ने मुस्लिम समुदाय से ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर तहखाने की चाबी ले ली थी। इसके बाद उन्होंने यह चाबी याचिकाकर्ता शैलेंद्र व्यास को सौंप दी थी। 24 जनवरी को तहखाने का दरवाजा DM के सामने खोला गया था। आज कोर्ट ने व्यास परिवार को पूजा-पाठकी इजाजत दे दी है।
मस्जिद में भगवान विष्णु, गणेश की मूर्तियां और शिवलिंग
कोर्ट के आदेश पर पुरातत्व विभाग (ASI) ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे किया था और सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। इसके बाद यह रिपोर्ट 25 जनवरी को कोर्ट में सार्वजनिक हुई थी। रिपोर्ट में पुरातत्व विभाग (ASI) ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर भगवान विष्णु, गणेश की मूर्तियां और शिवलिंग है।
पुरातत्व विभाग (ASI) ने अपनी रिपोर्ट में ज्ञानवापी के स्थान पर मंदिर होने के 34 साक्ष्य कोर्ट को बताए हैं। यह भी बताया कि मस्जिद के अंदर ‘महामुक्ति मंडप’ नाम का एक शिलापट भी मिला है। साथ ही यह भी बताया कि मस्जिद मंदिर के स्ट्रक्चर पर खड़ी है। 839 पेज की रिपोर्ट में ASI ने कहा है कि औरंगजेब के शासन में 17वीं में मंदिर में तोड़फोड़ कर मस्जिद को बनाया गया था।
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