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Video : चौकीदार कायर बा… नेहा सिंह राठौड़ ने Operation Sindoor पर गाया गाना

नेशनल डेस्क : भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौड़ जो अपने तीखे और व्यंग्यात्मक गीतों के लिए जानी जाती हैं, एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने भारत सरकार के “ऑपरेशन सिंदूर” और भारत-पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सीजफायर को लेकर एक नया व्यंग्यात्मक गीत पेश किया है, जिसमें उन्होंने सरकार की विदेश नीति, फैसलों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर तंज कसा है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

सीजफायर और ‘डोनाल्ड ट्रंप‘ पर तंज

आपको बता दें कि नेहा सिंह राठोड़ ने अपने गाने में विशेष तौर पर सीजफायर के लिए अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के कथित मध्यस्थता प्रयासों का उल्लेख करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की है। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत की ओर से ‘मजबूती’ कम दिखी और यह “शांति की जीत से ज़्यादा एक राजनैतिक मजबूरी” जैसा नजर आया। गाने के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यंग्य है, और इसे उसी तरह समझा जाए। उन्होंने आग्रह किया कि इस गाने के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज न की जाए, क्योंकि यह एक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है।

सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद…

नेहा सिंह राठौड़ का यह गाना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस और नाराजगी का दौर शुरू हो गया है। कई यूजर्स ने इसे देशविरोधी और सैनिकों के बलिदान का अपमान बताया है। एक व्यक्ति ने ट्वीट कर कहा,”यूपी पुलिस से मेरा निवेदन है कि कृपया इस वीडियो पर उचित एक्शन लें, क्योंकि यह देश के मौजूदा तनावपूर्ण माहौल को खराब करेगा और दुश्मन देश इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है।” कई अन्य लोगों ने भी इसे “मनोबल गिराने वाला” और “देश की एकता के खिलाफ” करार दिया है, और नेहा पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अभिव्यक्ति की आजादी बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

यह विवाद एक बार फिर से उस बहस को जन्म दे रहा है जो अक्सर भारत में उठती है – अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान। एक ओर जहां कलाकारों को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय संवेदनाओं और सीमावर्ती तनाव जैसे मुद्दों पर संवेदनशीलता बरतना भी जरूरी है। नेहा का पक्ष है कि उनका उद्देश्य सरकार या सेना का अपमान नहीं, बल्कि जनभावना और नीतियों की आलोचना के जरिए लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करना है।

क्या होगा आगे?

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कैसे लेता है क्या यह सिर्फ एक सोशल मीडिया विवाद तक सीमित रहेगा या फिर वास्तविक कानूनी कार्रवाई का रूप लेगा। साथ ही यह मामला एक बड़ा सवाल भी उठाता है क्या व्यंग्यात्मक कला की सीमा तय की जानी चाहिए?

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