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योगी सरकार टीबी रोगियों के करीबियों की हर तीन महीने में कराएगी जांच

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों एवं पूर्व टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग कराने का निर्णय लिया है। यह स्क्रीनिंग हर तीन महीने पर होगी। वहीं, साल के खत्म होने में 42 दिन शेष हैं, ऐसे में वर्ष के अंत तक हर जिलों को प्रिजेंम्टिव टीबी परीक्षण दर के कम से कम 3 हजार के लक्ष्य को हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने सभी जिला क्षय रोग अधिकारियों (डीटीओ) को पत्र जारी किया है। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेना शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में टीबी रोगियों की युद्धस्तर पर स्क्रीनिंग की जा रही है। इसी क्रम में सभी डीटीओ को डेटा की नियमित मॉनिटरिंग और कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने बताया कि टीबी के संभावित लक्षण वाले रोगियों की कांटैक्ट ट्रेसिंग और स्क्रीनिंग को बढ़ाते फेफड़ों की टीबी (पल्मोनरी टीबी) से संक्रमित सभी लोगों के परिवार के सदस्यों और कार्यस्थल पर लोगों की बलगम की जांच को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कांटैक्ट ट्रेसिंग और स्क्रीनिंग जितनी ज्यादा होगी, उतने ही अधिक संख्या में टीबी मरीजों की पहचान हो पाएगी और उनका इलाज शुरू हो पाएगा। इसी क्रम में उच्च जोखिम वाले लोगों जैसे 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, डायबिटीज रोगियों, धूम्रपान एवं नशा करने वाले व्यक्तियों, 18 से कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले व्यक्तियों, एचआईवी ग्रसित व्यक्तियों और वर्तमान में टीबी का इलाज करा रहे रोगियों के संपर्क में आए व्यक्तियों की हर तीन माह में टीबी की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए नैट मशीनों का वितरण सभी ब्लॉकों पर टीबी की जांच को ध्यान रखने में रखते हुए करने के निर्देश दिए गए हैं।

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