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गन्ना उत्पादक किसानों के सब्र की परीक्षा ले रही सरकार : कुमारी सैलजा

January 18, 2023

गन्ना उत्पादक किसानों के सब्र की परीक्षा ले रही सरकार : कुमारी सैलजा

चंडीगढ़: अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि मौजूदा सीजन में गन्ने का भाव न बढ़ाकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार प्रदेश के किसानों के सब्र का इम्तिहान ले रही है। चीनी मिलों में किसान का सवा दो महीने से गन्ना जा रहा है, लेकिन भाव न बढ़ाकर गठबंधन सरकार उनके साथ ज्यादती करने पर तुली हुई है। सरकार द्वारा गन्ने का भाव बढ़ाने से इंकार करना साफ संकेत है कि किसान को बर्बाद करने के लिए उसकी फसल के सही दाम तक नहीं देने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि रस निकाले जाने के बाद गन्ने की खोई शुगर मिल से 400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है, जबकि किसान को गन्ने का भाव पिछले साल वाला 362 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहा है। गन्ने की लागत और किसान की मेहनत को देखते हुए गन्ने का भाव इस बार कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए था, लेकिन दाम न बढ़ाकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने किसानों को बड़ा धोखा दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सवा दो महीने से भी अधिक समय से चीनी मिलें चल रही हैं और किसान इस साल बिना भाव तय हुए ही पहले दिन से ही अपना गन्ना मिलों को देता रहा। यह किसान ही है, जो बिना भाव तय हुए अपने उत्पाद को राष्ट्र हित में चीनी मिलों तक पहुंचाता रहा है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि इस साल मुद्रा स्फीति की दर में 7 प्रतिशत तक बढ़ाेतरी हुई है। इससे साफ है कि किसान को पिछले साल के मुकाबले गन्ना बेचने पर 7 प्रतिशत का सीधा नुकसान होगा। पिछले साल का रेट 362 रुपये प्रति क्विंटल रुपये था, जिसमें महंगाई को देखते हुए निश्चित तौर पर बढ़ोतरी की जानी चाहिए थी। गन्ने के दाम में बढ़ोतरी न करना गठबंधन सरकार के ईशारे पर किसानों के साथ मिलों द्वारा षड्यंत्र के तहत की गई लूट का सबसे बड़ा उदाहरण है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सीजन में मिल शुरू होते ही कोई भी भाव तय करने की बजाए भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने गन्ने की फसल पर प्रति क्विंटल 7 प्रतिशत वजन कटौती का आदेश तुरंत लागू कर दिया था, ताकि चीनी मिलों को फायदा पहुंचाया जा सके। इसके विपरीत पड़ोसी राज्य पंजाब में यह कटौती महज 3 प्रतिशत ही है। इससे पता चलता है कि प्रदेश सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है।

 

 

 

 

 

 

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