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कोयला घोटाला मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विजय दर्डा व उनके बेटे की 4 साल जेल की सजा निलंबित की

September 26, 2023

कोयला घोटाला मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विजय दर्डा व उनके बेटे की 4 साल जेल की सजा निलंबित की

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा और जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनोज कुमार जायसवाल की चार साल की सजा को निलंबित कर दिया। छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितताओं में शामिल होने के कारण 26 जुलाई को उन्हें एक साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने 28 जुलाई को दरदास और जयासवाल को 26 सितंबर तक अंतरिम जमानत दे दी थी, और मामले में उन्हें दोषी ठहराने और सजा सुनाने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दरदास और जयसवाल की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भी जवाब मांगा था। मंगलवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने याचिकाएं स्वीकार कर लीं और मामले में उनकी दोषसिद्धि और जेल की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों के लंबित होने तक सजा को निलंबित कर दिया।

अदालत ने उन्हें अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि वे मामले में गवाहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन या धमकी न दें। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘यह निर्देशित किया जाता है कि अपीलकर्ता पर लगाई गई सजा वर्तमान अपील के लंबित रहने के दौरान निलंबित रहेगी, बशर्ते वह एक लाख रुपये की राशि का निजी बांड और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करे..।‘

दोषियों की ओर से पेश वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और वे मुकदमे के दौरान जमानत पर थे। उन्होंने कभी भी जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने न्यायाधीश को बताया कि निचली अदालत द्वारा लगाया गया जुर्माना दोषियों द्वारा पहले ही जमा कर दिया गया है। इसलिए, अदालत से अपील के लंबित रहने के दौरान उन पर लगाई गई सजा को निलंबित करने का आग्रह किया गया।

दूसरी ओर, सीबीआई की ओर से पेश वकील तरन्नुम चीमा ने सजा निलंबित करने की याचिका का विरोध किया। उच्च न्यायालय ने अब अपीलों को 14 फरवरी, 2024 को विचार के लिए सूचीबद्ध किया है। आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था।

20 नवंबर 2014 को अदालत ने इस मामले में सीबीआई द्वारा पेश क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और जांच एजेंसी को नए सिरे से जांच शुरू करने का निर्देश दिया था, जिसमें कहा गया था कि पूर्व सांसद दर्डा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संबोधित पत्रों में तथ्यों को ‘गलत तरीके‘ से पेश किया था। सिंह के पास कोयला विभाग भी था।

अदालत के अनुसार, विजय दर्डा, जो लोकमत समूह के अध्यक्ष हैं, ने जेएलडी यवतमाल एनर्जी के लिए छत्तीसगढ़ में फतेहपुर (पूर्व) कोयला ब्लॉक प्राप्त करने के लिए इस तरह की गलत बयानी का सहारा लिया। अदालत ने फैसला सुनाया था कि धोखाधड़ी का कार्य निजी संस्थाओं द्वारा एक साजिश के तहत किया गया था, जिसमें निजी पक्ष और लोक सेवक दोनों शामिल थे। जेएलडी यवतमाल एनर्जी को 35वीं स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा फतेहपुर (पूर्व) कोयला ब्लॉक प्रदान किया गया था।

शुरुआत में सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया कि जेएलडी यवतमाल ने 1999 और 2005 के बीच अपनी समूह कंपनियों को चार कोयला ब्लॉकों के पिछले आवंटन को गैरकानूनी तरीके से छुपाया था। हालांकि, एजेंसी ने बाद में एक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कहा गया कि कोयला ब्लॉक आवंटन के दौरान कोयला मंत्रलय द्वारा जेएलडी यवतमाल को कोई अनुचित लाभ नहीं दिया गया था।

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