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‘दो समुदायों के बीच पत्थरों की बरसात’…इस राज्य में दीवाली के दूसरे दिन लगता है अनोखा मेला

November 13, 2023

‘दो समुदायों के बीच पत्थरों की बरसात’…इस राज्य में दीवाली के दूसरे दिन लगता है अनोखा मेला

शिमला (गजेंद्र) : हिमाचल की राजधानी शिमला से करीब 30 किलोमीटर दूर धामी के हलोग में दीवाली के दूसरे दिन पत्थरों का एक अनोखा मेला लगता है। सदियों से मनाए जा रहे इस मेले को पत्थर का मेला या खेल कहा जाता है। दीपावली से दूसरे दिन मनाए जाने वाले इस मेले में दो समुदायों के बीच पत्थरों की जमकर बरसात होती है। जिसका नमूना आज भी धामी में देखने को मिला। जहाँ दोंनो तरफ से पत्थरों की जमकर बरसात हुई। 25 मिनट तक चले इस खेल का ये सिलसिला तब तक जारी रहा जब तक कि एक पक्ष लहूलुहान नही हो गया। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में सैंकड़ो की संख्या में लोग धामी मैदान में शामिल हुए।

धामी रियासत के राजा पूरे शाही अंदाज में मेले वाले स्थान पर पहुंचे। माना जाता है कि पहले यहां हर वर्ष भद्रकाली को नर बलि दी जाती थी। लेकिन धामी रियासत की रानी ने सती होने से पहले नर बलि को बंद करने का हुक्म दिया था। इसके बाद पशु बलि शुरू हुई। कई दशक पहले इसे भी बंद कर दिया गया। तत्पश्चात पत्थर का मेला शुरू किया गया। मेले में पत्थर से लगी चोट के बाद जब किसी व्यक्ति का खून निकलता है तो उसका तिलक माँ भद्रकाली के चबूतरे में लगाया जाता है।

राजवंश व लोगों का तो ये भी कहना है कि आज तक पत्थर लगने से किसी की जान नहीं गई है। पत्थर लगने के बाद मेले को बंद कर सती माता के चबूतरे पर खून चढ़ाया जाता है। साथ ही जिसको पत्थर लगता है उसका इलाज साथ लगते अस्पताल में करवाया जाता है। राज परिवार में यदि इस दौरान मौत भी हो जाए तो पहले मेले की रस्म निभाई जाती है उसके बाद दाह संस्कार किया जाता है।

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