
नई दिल्ली: देश के वरिष्ठ वकीलों ने बुधवार को कहा कि अमरीका के डिपार्टमैंट ऑफ जस्टिस (डीओजे) द्वारा अदाणी ग्रुप को लेकर दायर किए आरोपपत्र में कोई सबूत पेश नहीं किए गए हैं और न ही बताया है कि लेनदेन किसके साथ हुआ है, जो दिखाता है इस मामले का कोई आधार नहीं है और इसे जल्दबाजी में दायर किया गया है। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि अमरीका से जो अभियोग आया है, इसका कोई आधार नहीं है और न ही उनके पास कोई सबूत हैं। बड़ी बात है कि यह पूरा मामला अदाणी ग्रीन के बॉन्ड इश्यू करने को लेकर है और इसमें न ही अदाणी ग्रुप या न ही अदाणी ग्रीन को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा जेठमलानी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि ये भारत की ग्रोथ स्टोरी को रोकने के लिए यह है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि डिपार्टमैंट ऑफ जस्टिस (डीओजे) एक दिखावा है।
वे एक निर्वाचित राष्ट्रपति हैं और वे बहुत ही जिम्मेदारी भरा बयान दे रहे हैं। डीओजे अनुचित रूप से जल्दबाजी कर रहा है। अदाणी ग्रुप की कंपनी अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) द्वारा स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी में कहा कि अमरीका के डिपार्टमैंट ऑफ जस्टिस (डीओजे) द्वारा दायर आरोप पत्र में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी, भतीजे सागर अदाणी और सीनियर एग्जीक्यूटिव विनीत जैन पर गलत तरीके से लेन-देन का कोई आरोप नहीं है। आगे कहा कि अमरीकी डीओजे के अभियोग पत्र में पांच आरोप हैं। इनमें से किसी में भी गौतम अदाणी, सागर अदाणी और विनीत जैन का कोई उल्लेख नहीं हैं और न ही उन्हें पहले आरोप ‘एफसीपीए का उल्लंघन करने की साजिश‘ में शामिल किया गया है और न ही इन तीनों का नाम पांचवें आरोप ‘न्याय में बाधा डालने की साजिश‘ में शामिल किया गया है।
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