
Artifical Intelligence : एआई से दुनिया बदल रही है, विभिन्न क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल से व्यापक परिवर्तन हो रहा है। जाहिर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा, परिवहन, विज्ञान और स्वास्थ्य में भूमिका अहम होती जा रही है। जिस समस्या को हल करने में लंबा समय लगता था, अब एआई से बहुत जल्द उसका निदान हो सकता है। औषधि निर्माण में भी कुछ ऐसा ही होने वाला है। अब वह दिन दूर नहीं, जब जीवन रक्षक दवाओं को तैयार करने में कई दशक नहीं बल्कि कुछ ही महीने लगेंगे। इतना ही नहीं, दुर्लभ बीमारियों का इलाज भी जल्दी से हो सकेगा। साथ ही, आभासी रोगी महंगे और समय लेने वाले नैदानिक परीक्षणों की जगह लेंगे।
इस तरह औषधि उद्योग में क्रांति आ रही है। चीन इस दिशा में आगे बढ़कर काम कर रहा है। जबकि भारत में भी इसके विकास की भारी संभावना है। हमने देखा है कि चीन एआई के इस्तेमाल को लेकर बहुत गंभीर है, जिसके चलते चीन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सही इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। बताया जाता है कि चीनी परंपरागत औषधि (टीसीएम) के विकास में एआई की भूमिका अहम हो सकती है। क्योंकि मशीन लर्निंग जटिल पैटर्न पहचान के माध्यम से उपचार की सटीकता को बढ़ाती है। यह एआई द्वारा विश्लेषण की गई जीभ की तस्वीरों के माध्यम से टीसीएम सिंड्रोम अंतर की अधिक सटीकता से स्पष्ट होता है।
चीनी विज्ञान अकादमी के विशेषज्ञों के मुताबिक, संपूर्ण दवा विकास श्रृंखला को प्रभावित करने की एआई की क्षमता महत्वपूर्ण है। सफल दवा-लक्ष्य इंटरैक्शन की भविष्यवाणी करने और आणविक डिज़ाइन को सुव्यवस्थित करने की इसकी क्षमता ने पहले ही पूरे उद्योग में दक्षता और प्रभावशीलता दोनों में काफी सुधार किया है।
चीन के पड़ोसी देश भारत की बात करें, तो वह दवाओं का प्रमुख निर्माणकर्ता और बाजार है। जैसा कि हम जानते हैं कि भारत की सस्ती और जेनरिक दवाएं विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। अगर भारत एआई का औषधि क्षेत्र में सही ढंग से इस्तेमाल करने में सफल रहा है, तो क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकता है। इस बीच एआई से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान में तेजी से बदलाव देखने में आ रहा है। जिसमें विशाल डेटासेट का विश्लेषण, रोग प्रवृत्तियों की भविष्यवाणी और नवीन समाधान के जरिए दवाओं का विकास करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक, एआई आणविक डेटा का विश्लेषण करते हुए दवा की परस्पर क्रिया का अनुकरण कर दवा खोज प्रक्रिया को गति देता है। भारत दवा उद्योग में एक प्रमुख प्लेयर है, ऐसे में उसे एआई अनुसंधान प्रयासों को बढ़ावा देने पर काम करने की जरूरत है।
यह स्पष्ट है कि औषधियों के शोध और विकास के अलावा, एआई दवा डिजाइन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि एआई नई दवाओं को डिज़ाइन करने में लगने वाले समय को 70 फीसदी तक कम कर सकता है और सफलता की संभावना को व्यापक रूप से बढ़ा सकता है।
दरअसल, दवा परीक्षण की भारी लागत ने लंबे समय से नवाचार में बाधा पैदा की है। लेकिन अब एआई आभासी कोशिकाओं और सिलिकॉन-आधारित “रोगियों” की शुरूआत के माध्यम से इसे बदल रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने नैदानिक उपचारों को अनुकूलित करने वाले बायोमार्कर की पहचान करने के लिए कई आभासी स्तन कैंसर रोगियों की जांच की। जिसने अत्यधिक सटीक परिणाम दिए, जो वास्तविक दुनिया के डेटा को बारीकी से दर्शाते हैं। इससे पता चलता है कि एआई से किस तरह इस क्षेत्र में क्रांति आ सकती है।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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